जालंधर (रिची रोहित ) 11/नवंबर । अमृतसर में 4 नवंबर 2022 को शिवसेना हिंदुस्तान के नेता सुधीर सूरी की गोली मार हत्या कर दी गई | गौरतलब है की पुलिस की मौजदगी में उनकी हत्या हुई मौके पर एसपी एसएचओ के साथ 8 पुलिस वाले उनकी सुरक्षा में तैनात थे | फिर भी पुलिस वालों के सामने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई | हर घटना को यदि राजनीतिक रंग रूप दे दिया जाए तो व्यापक सवाल उठने ही बंद हो जाएंगे | सवाल उठते हैं पंजाब पुलिस के कार्यशैली पर कि कहां है उनका इंटेलिजेंस और गुप्त सूचना विभाग आदि | सरकारें बदलती रही है लेकिन पंजाब पुलिस की कारगुजारी में सुधार आता नहीं दिख रहा | यह ऐसी कोई पहली घटना नहीं है इसे समझने के लिए हमें 2015 जनवरी की घटना को याद करना होगा जब मशहूर गैंगस्टर सुखा कालवा को पुलिस के सामने ही मौत के घाट उतार दिया गया था | जब उसको पेशी के लिए कोर्ट ले जाया जा रहा था | तब सरकार थी अकाली दल की | युवा अकाली दल लीडर विक्की मिट्ठू खेड़ा की गोली मारकर हत्या कर दी गई तारीख थी 7 अगस्त 2021 और सरकार रही कांग्रेस की | वही मशहूर गायक सिद्दू मूसे वाला जिन्होंने कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, 29 मई 2022 को उनकी भी गोली मारकर हत्या कर दी गई | उनको आए दिन धमकियां मिल रही थी ऐसे में पंजाब पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी है कि कैसे काम करता है पंजाब का इंटेलिजेंस | ऐसे में हद तो तब हो गई जब पंजाब पुलिस के मोहाली स्थित इंटेलिजेंस हेड क्वार्टर पर आरपीजी अटैक हुआ, 6 मई 2022 की शाम को हुआ था | कैसे नींद और कितनी गहरी नींद में सो रहा था पंजाब का इंटेलिजेंस ब्यूरो | हम यहां किसी सरकार की आलोचना नहीं कर रहे हैं हमारा सीधा सवाल पंजाब पुलिस प्रशासन से है कि पाकिस्तान बॉर्डर के साथ लगने वाला पंजाब प्रदेश और पंजाब खुफिया तंत्र की इतनी नाकामी और यदि आने वाले समय में ध्यान नहीं दिया गया तो यह प्रमुख घटनाएं किसी बड़ी अनहोनी की ओर अंदेशा करती हैं | नई सरकार आने पर बहुत बड़ी-बड़ी बातें कही सुनी जाती है पर क्या सुधार हुए हैं इस बारे में नए डीजीपी ने भी रोशनी नहीं डाली |







