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भगवंत मान सरकार में शिकायतकर्ता ही निशाने पर?

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जालंधर में अवैध निर्माण की शिकायत के बाद पत्रकार को आया रहस्यमयी फोन, उठे कई गंभीर सवाल

जालंधर। पंजाब में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावों के बीच जालंधर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हमारे समाचार ब्यूरो प्रमुख रिची रोहित ने कुछ समय पहले झंडू सिंगा क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण की शिकायत संबंधित विभाग को दी थी। इस मामले को हमारी अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित भी किया। आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक निर्माण के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गोरतालब है कि जब अवैध निर्माण की शिकायत जेई अमनदीप से की थी तब एक मंज़िल बनी थी वो भी अधूरी थी काम चल रहा था अब दूसरी मंजिल बन चुकी है ये बिना मिली भगत के कैसे हो सकता है | बताया जाता है कि इस मामले की जानकारी संबंधित PUDA अधिकारियों, जिनमें इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह और निलेश अरोड़ा का नाम भी शामिल है, को दी गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि विभाग ने कोई कार्रवाई की है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?

मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब वरिंदर शर्मा नामक एक व्यक्ति, जिसने स्वयं को एक पत्रकार बताया, ने हमारे समाचार ब्यूरो प्रमुख रिची रोहित को फोन किया। रिची रोहित का कहना है कि फोन पर उनसे पूछा गया, “आप डॉक्टर साहिब को फोन क्यों कर रहे हैं?” जो अस्पताल बना रहे हैं !

हैरानी की बात यह है कि रिची रोहित के अनुसार उन्होंने संबंधित डॉक्टर को न तो कोई फोन किया और न ही कोई संदेश भेजा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह जानकारी किस आधार पर दी गई? और आखिर उनके निजी मोबाइल नंबर तक यह व्यक्ति कैसे पहुँचा?

अब कई अहम सवाल सामने हैं—

● क्या शिकायतकर्ता की पहचान और मोबाइल नंबर विभाग से लीक हुआ?

● क्या शिकायत करने वालों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है?

●  या इसके पीछे कोई संगठित प्रयास है?

● कौन है ये वरिंदर शर्मा और अवैध बिल्डिंग या उसके मालिको से क्या संबंध है उसका ?

● क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?

हमारी अखबार इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग करती है। यदि किसी विभागीय अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका पाई जाती है तो उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यदि किसी पक्ष के पास इस मामले पर अपना स्पष्टीकरण या पक्ष है, तो हमारी अखबार उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगी।

सवाल सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का है जो भ्रष्टाचार या कथित अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज उठाने का साहस करता है।

 

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