जंडूसिंघा में अवैध निर्माण पर किसका संरक्षण इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह की मिली भगत का नतीजा ! शिकायतों के बावजूद खड़ी हो गई दो मंजिला इमारत, JDA की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जंडूसिंघा क्षेत्र में कथित अवैध व्यावसायिक निर्माण को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। सूत्रों के अनुसार इस निर्माण की शिकायत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तथा संबंधित विभाग के इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह को काफी समय पहले दी गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका और अब मौके पर दो मंजिला इमारत खड़ी हो चुकी है।
इस पूरे मामले को लेकर लोगों में भारी रोष देखा जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि शिकायत समय रहते विभाग तक पहुंच गई थी तो फिर निर्माण कार्य को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
हमारे पत्रकार Richi Rohit ने जब इस संबंध में इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह से बात की तो उनका कहना था कि उन्होंने कई बार निर्माणकर्ताओं को काम बंद करने के लिए कहा था, लेकिन उनके कहने के बावजूद काम नहीं रुका और राजस्व अधिकारी को शिकायत भेज दी है वो कुछ नहीं कर रहे ऐसा कहते रहे एक सरकार अधिकारी अपने इलाके में अवैध निर्माण रोक नहीं पा रहा है तो ( किसी शायर ने कहा, कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते) | यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या केवल मौखिक अनुरोध करना ही विभागीय कार्रवाई माना जाएगा या फिर नियमों के तहत कोई सख्त कदम भी उठाया जाना चाहिए था?
शिकायत करने के बाद तेज़ी से अवैध निर्माण कैसे हो गया !
मामले ने अब कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर इसके पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण काम कर रहा है? इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच विजिलेंस विभाग द्वारा करवाई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सबकी निगाहें अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर टिकी हैं। देखना होगा कि सरकार इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
फिलहाल जंडूसिंघा का यह निर्माण प्रशासनिक जवाबदेही और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के दावों को कठघरे में खड़ा करता नजर आ रहा है।







