Doaba News Jalandhar
जालंधर लोकसभा उपचुनाव के चलते शहर में अंदरखाते कई तरह के अवैध काम जोरों पर चल रहे हैं। कारण यह है कि अफसर व्यस्त हैं और आचार संहिता लगी हुई है। ऐसे में देखने वाला कोई नहीं। यह वक्त अवैध धंधों को हवा देने के लिए माफिक है। इसी तरह का एक मामला सामने आया जालंधर शहर के वार्ड नंबर 15 में जहां सरेआम रोड साइड अवैध क्वार्टरों का निर्माण जारी है। न तो निगम का इसकी ओर ध्यान है और न ही प्रशासन का।

राजनीतिक मंशा के बगैर ऐसे काम होने संभव नहीं
जब भी कहीं अवैध निर्माण होता है तो उसके पीछे कहीं न कहीं राजनीतिक लोगों का हाथ निकलता है। या किसी न किसी की शह पर निर्माण हो रहा होता है। सरेआम रोड पर अवैध निर्माण हो रहा हो और कोई रोके भी नहीं तो इसका साफ मतलब है कि दाल में कुछ काला जरूर है। अवैध निर्माण होना जालंधर सिटी में नया नहीं है। इससे पहले भी यहां अवैध निर्माणों को लेकर चर्चा रही है।

कैप्टन की कांग्रेस सरकार में नवजोत सिंह सिद्धु के निकाय मंत्री रहते अवैध निर्माण के लिए चर्चा में आया था जालंधर
कैप्टन अमरेंदर सिंह की कांग्रेस सरकार में जब नवजोत सिंह सिद्धू को निकाय मंत्री का जिम्मा मिला था तो उन्होंने अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई करने का प्रण लिया था। तब जालंधर में पहुंचे सिद्धु ने अफसरों की क्लास ली थी और बड़े स्तर पर अवैध इमारतों को गिरवा दिया था। सैकड़ों इमारतें ऐसी पकड़ी गई थीं जो किसी न किसी पार्टी से संबंधित कारिंदों की तरफ से बनाई गई या बनवाई गई थीं। एक दिन में हुई इस बड़ी कार्रवाई से जालंधर अवैध निर्माण को लेकर एकाएक चर्चा में आया था। हालांकि इसके बाद कई तरह के सवाल उठने पर सिद्धू से निकाय विभाग वापस ले लिया गया था। इसके बाद से भी इस तरह के भ्रष्टाचार पर कोई लगाम नहीं लगी।
लतीफपुरा में हुई प्रशासन की कार्रवाई के बाद भी प्रशासन पर ही उठे थे अवैध कब्जे करवाने के सवाल
हाल ही में रातों-रात जालंधर प्रशासन ने 40 साल से भी ज्यादा वक्त से रहे रहे लतीफपुरा वासियों पर कार्रवाई करते हुए उनके निर्माण गिरा दिए थे। तब फिर से जालंधर अवैध निर्माण के गढ़ के तौर पर उभरकर सामने आया। मीडिया में यह सवाल उठे कि पहले 40 साल से प्रशासन ने क्यों कदम नहीं उठाए। जब लोग अवैध कब्जा कर रहे थे तब वोट बैंक दिख रहा था और कब्जे होने दिए जा रहे थे। अब एकाएक सरकार बदली तो जेसीबी से निर्माण गिरा दिए गए। लोगों को शिफ्ट होने का वक्त भी नहीं दिया। लोगों ने रातें बाहर बिताईं। बिस्तर से लेकर बर्तन तक रोड पर रख दिए गए। सवाल यह है कि निर्माण होते ही अवैध निर्माण क्यों नहीं गिराया जाता। क्या प्रशासन की मंशा में कुछ और होता है?







