पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच जुबानी जंग एक बार फिर बढ़ गई है। मामला इतना गर्म हो गया कि राज्यपाल ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जब तक मैं पंजाब में हूं, सरकारी हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं करूंगा। पंजाब विधानसभा में सीएम भगवंत मान की ‘अपमानजनक’ टिप्पणी से नाराज राज्यपाल पुरोहित ने मान पर पलटवार किया। राजभवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरोहित ने कहा, मुझे एक हेलीकॉप्टर दिया गया है। मैंने इसे आधिकारिक ड्यूटी के लिए इस्तेमाल किया था न कि निजी इस्तेमाल के लिए और सीमा क्षेत्र का दौरा किया, जिसमें पंजाब के अधिकारी भी मेरे साथ थे। अब मैंने घोषणा की है कि जब तक मैं पंजाब में हूं, मैं पंजाब सरकार के हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं करूंगा।
पुरोहित ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में उनका मजाक उड़ाया और कहा कि राज्यपाल ”इतने सारे प्रेम पत्र लिख रहे हैं।” राज्यपाल ने कहा, ये एक सीएम के शब्द हैं। राज्यपाल को राज्य के मामलों के बारे में सीएम से जानकारी मांगने का अधिकार है। मैंने उनका व्यक्तिगत विवरण नहीं मांगा है। उन्हें संविधान और संविधान के अनुसार मेरे सभी पत्रों का जवाब देना है।
बता दें कि आम आदमी पार्टी के बहुमत वाले सदन ने बुधवार को राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाने से संबंधित एक विधेयक पारित किया। चर्चा के दौरान मान ने राज्यपाल द्वारा राज्य के हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। मान ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि पंजाब और पंजाबियों के हित की रक्षा करने के बजाय राज्यपाल ‘‘अक्सर दूसरी तरफ खड़े दिखायी देते हैं।’’ मान ने कहा, ‘‘वह मेरा हेलीकॉप्टर (सरकारी हेलीकॉप्टर) ले जाते हैं और फिर मुझसे दुर्व्यवहार करते हैं…मुझे नहीं लगता कि इतने हस्तक्षेप की जरूरत है। उनका कर्तव्य शपथ दिलाना है…इसका मतलब यह नहीं है कि वह हर छोटी चीज के लिए परेशानी खड़ी करें।’’
रोहित ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि मुख्यमंत्री अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करके जवाब देने से बच सकते हैं। मैं अपना कर्तव्य निभा रहा हूं, चाहे कोई खुश हो या नहीं। मुझे अपना कर्तव्य निभाना है और मैं काम करूंगा।’’ राज्यपाल ने यह भी सवाल उठाया कि क्या उन्होंने तब “पाप” किया है जब उन्होंने मान सरकार से एक “दागी मंत्री” को हटाने के लिए कहा।’’ उनका परोक्ष तौर पर इशारा लाल चंद कटारुचक की ओर था, जिन पर “यौन दुराचार” का आरोप लगा था।







