पंजाब पुलिस और भगवंत मान सरकार को किसान आंदोलन जिसमें पंजाब की मुख्य भूमिका रही और सीजेपी जेनज़ी का आंदोलन जिन्होने मोदी सरकार को झुका दिया पंजाब में चिट्टे की समस्या तेज़ी से बड रही है और किसकी मिली भगत से कौन बेच रहा है सबको पता है पंजाब पुलिस भी यही की है कोई मंगल गृह से नहीं आया है असल में पंजाब पुलिस को या सरकार को ऐसे किसी आंदोलन का इंतजार नहीं करना चाहिए जब लोग नशे के खिलाफ सड़क पर उतरे
किसान आंदोलन में पंजाब आगे था… मोदी सरकार झुक गई। अब सवाल है—क्या नशे के खिलाफ भी पंजाब को फिर से सड़कों पर उतरना पड़ेगा?
पंजाब ने जब-जब आवाज़ उठाई, पूरे देश ने उसे सुना। किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर इतिहास लिखा और आखिरकार केंद्र सरकार को अपने फैसले बदलने पड़े। लेकिन आज पंजाब का सबसे बड़ा दुश्मन न सीमा पर है, न राजनीति में… बल्कि वह ज़हर है जो युवाओं की नसों में उतर रहा है।
हर गली, हर मोहल्ले में चर्चा है कि आखिर यह चिट्टा कहाँ से आ रहा है? अगर लोगों को पता है कि नशा कहाँ बिक रहा है, तो क्या प्रशासन को नहीं पता? अगर शिकायतें बार-बार सामने आ रही हैं, तो फिर बड़े नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई कब होगी?
सबसे बड़ा सवाल पंजाब पुलिस और भगवंत मान सरकार से है—क्या आप किसी बड़े जनआंदोलन का इंतज़ार कर रहे हैं?
क्या सरकार चाहती है कि पहले लाखों लोग सड़कों पर उतरें, धरने लगें, मोर्चे निकलें, तब जाकर व्यवस्था पूरी ताकत से जागे? क्या पंजाब के युवाओं की ज़िंदगियाँ इतनी सस्ती हो चुकी हैं कि कार्रवाई का पैमाना जनता का गुस्सा बने?
आज पंजाब का हर जागरूक नागरिक यही पूछ रहा है—युद्ध नशों के विरुद्ध केवल नारा है या ज़मीन पर निर्णायक लड़ाई भी?
अगर सरकार सचमुच नशा खत्म करना चाहती है तो केवल छोटे-मोटे मामलों से नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना होगा। जो भी दोषी हो—चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो—उसके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
पंजाब को एक और किसान आंदोलन नहीं चाहिए। पंजाब को अपने युवाओं का भविष्य चाहिए
क्योंकि जिस दिन नशे के खिलाफ जनता उसी तरह सड़कों पर उतर गई, जिस तरह किसान आंदोलन में उतरी थी, उस दिन यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही का सबसे बड़ा इम्तिहान होगा।







