जालंधर (रिची रोहित) जालंधर के वेरका मिल्क प्लांट रोड के पीछे सलीमपुर में कथित तौर पर नाजायज कॉलोनी काटे जाने का मामला सामने आया है। आरोप हैं कि जरूरी सरकारी मंजूरियों के बिना प्लॉटिंग और कार्य किए जा रहे हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सवाल यह उठता है कि यदि कॉलोनी के निर्माण और प्लॉटिंग के लिए जरूरी मंजूरियां नहीं ली गई हैं तो इतने बड़े स्तर पर काम किसकी अनुमति से चल रहा है। क्या संबंधित विभागों को इस मामले की जानकारी है और क्या अब तक निर्माण एवं प्लॉटिंग की जांच की गई है?
बिल्डिंग इंस्पेक्टर मनीष अरोड़ा पर उठे सवाल
इस मामले में बिल्डिंग ब्रांच के इंस्पेक्टर मनीष अरोड़ा पर कथित सेटिंग के जरिए अवैध निर्माण और कॉलोनियों के काम को चलने देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से उनके कामकाज पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं और उनकी विजिलेंस जांच की मांग उठाई गई है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित जमीन के दस्तावेजों कॉलोनी की मंजूरियों और विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
जॉइंट कमिश्नर सुमनदीप कौर और इंस्पेक्टर के ध्यान में लाया गया मामला
मामले को लेकर हमारे पत्रकार रिची रोहित द्वारा नगर निगम की जॉइंट कमिश्नर सुमनदीप कौर और बिल्डिंग इंस्पेक्टर मनीष अरोड़ा के ध्यान में भी पूरा मामला लाया गया था।
पत्रकार रिची रोहित के अनुसार दोनों अधिकारियों को व्हाट्सऐप के माध्यम से शिकायत नंबर भी भेजा गया था। उनका कहना है कि दोनों अधिकारियों की ओर से बावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद जब दोनों अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो पत्रकार के अनुसार किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया। सुमनदीप कौर जैसी अधिकारी का ये नया तरीका है भ्रष्टाचार करने का या फिर उस पर पर्दा डालने का
ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित अधिकारियों के ध्यान में मामला लाए जाने के बाद इसकी जांच के लिए क्या कदम उठाए गए। क्या संबंधित विभाग ने मौके का निरीक्षण किया और क्या कॉलोनी से जुड़े दस्तावेजों तथा मंजूरियों की जांच की गई?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं जबकि कथित तौर पर बड़े स्तर पर प्लॉटिंग और निर्माण कार्य जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं।
यदि किसी कॉलोनी का विकास आवश्यक मंजूरियों के बिना किया जा रहा है तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है कि वे नियमानुसार जांच करें और उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई करें। वहीं यदि सभी जरूरी मंजूरियां मौजूद हैं तो विभाग को रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सलीमपुर में कथित कॉलोनी के मामले में बिल्डिंग ब्रांच के इंस्पेक्टर मनीष अरोड़ा की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई गई है। मांग है कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका विभागीय रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांची जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि नगर निगम इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या कथित कॉलोनी की मंजूरियों और प्लॉटिंग की जांच होगी? क्या अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी? और क्या शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी?
मनीष अरोड़ा ने जो भी चालान किया या नोटिस जारी किये उनकी जांच करेगी विजिलेंस तो मोटे माल का पता चलेगा जो भ्रष्टाचार से बना गया है !
नोटिस जारी करने के बाद होता है भ्रष्टाचार का असली खेल
भगवंत मान सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर भी नजर
सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती रही है। ऐसे में सलीमपुर में कथित नाजायज कॉलोनी का मामला संबंधित विभागों के लिए जांच का विषय है। अब देखना होगा कि नगर निगम और विजिलेंस विभाग मामले की जांच को लेकर क्या कदम उठाते हैं और सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान से बचाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।


